Normal Hemoglobin Range: नार्मल हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए ? (Image: canava)

क्रिया पाठ योजना | Kriya Lesson Plan In Hindi For B.Ed / STC

3. जिन शब्दों से किसी कार्य का करना या होना व्यक्त हो उन्हें क्या कहते है ?

4. क्रिया के बारे में आप क्या जानते हैं ?

अच्छा बच्चों ! आज हम क्रिया के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे ।

छात्र अध्यापक व्याख्यान विधि व चार्ट के माध्यम से कक्षा में अपना पाठ प्रस्तुत करेंगी ।

छात्र अध्यापक क्रियाएं

मूल वाक्य के साथ क्रिया का उपयोग चार्ट ।

जिन शब्दों से किसी कार्य का करना या होना व्यक्त हो उन्हें क्रिया कहते हैं ।

क्रिया को चार्ट के माध्यम से समझाया जाएगा ।

शिक्षक श्यामपट्ट पर क्रिया के भेद के बारे में विस्तार से बताएगा ।

कर्म के आधार पर – 1. सकर्मक क्रिया 2. अकर्मक क्रिया

सूचना के आधार पर – 1. संयुक्त क्रिया 2. नामधातु क्रिया 3. प्रेरणार्थक क्रिया 4. पूर्वकालिक क्रिया 5. कृदन्त क्रिया

काल के आधार पर – 1. भूतकालिक क्रिया 2. वर्तमान कालिक क्रिया 3. भविष्य कालिक क्रिया

छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे व समझेंगे ।

छात्र क्रिया जोड़कर नए वाक्य बनाएंगे ।

प्रश्नों द्वारा आकलन छात्रों की अभिव्यक्ति द्वारा ।

जिस वाक्य में कर्म प्रधान होता है तथा क्रिया का फल कर्ता पर ना पढ़कर कर्म पर पड़ता है उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं । जैसे – राहुल आम खाता है ।

वाक्य में खाने का फल आम पर पड़ता है । अतः आम कर्म है ।

जिन क्रियाओं का फल कर्ता पर पड़ता है तथा कर्म पर नहीं उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं । जैसे- मनोज सोता है यहां मनोज ( कर्ता ) द्वारा ही क्रिया पूरी हो रही है ।

जब वाक्य में दो कर्म हो तो उसकी क्रिया द्विकर्मक कहलाते हैं जैसे राम ने श्याम को पुस्तक दी । इस वाक्य में दो कर्म है ।

छात्र प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करेंगे ।

1‍. जिन शब्दों से किसी कार्य के करने या होने का पता चले , उन्हें क्या कहते हैं ?

2. क्रिया की पहचान क्या है ?

शिक्षक पुनः क्रिया प्रधान मूल शब्दों का वाक्य में प्रयोग करने के लिए कहेगा ।

छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे व अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखेंगे ।

क्रिया किसे कहते हैं ?

क्रिया का प्रयोग क्यों जरूरी हैं ?

“राम ने रावण को मारा ।” इस वाक्य में कर्म पद कौनसा है ?

क्रिया के कितने भेद बताए गए हैं ?

क्रिया और उसके भेद लिखिए ?

जिस क्रिया का कर्म होता है , उसे कौनसी क्रिया चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? कहते हैं ?

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डायबिटीज टाइप 2 से छुटकारा पाने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं- ये है पूरा ‘डाइट चार्ट

इस लेख में जानेंगे कि डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के भोजन को ग्रहण करना चाहिए और किस तरह के भोजन को नहीं ग्रहण करना चाहिए। साथ ही इस संबंध में हम विशेषज्ञ की राय भी जानेंगे।

Diet chart to get rid of Diabetes type 2

आज के भागदौड़ भरे जीवन में मधुमेह यानी डायबिटीज होना बड़ी समान्य सी बात हो गई है और इसके के लिए बाजार में भी कई प्रकार की दवाईयां उपलब्ध हैं लेकिन डायबिटीज के उपचार के लिए दवाईयों से अधिक खानपान का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। भोजन ही है जो डायबिटीज को नियंत्रित कर सकता है।

इस लेख में जानेंगे कि डायबिटीज टाइप-2 को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के भोजन को ग्रहण करना चाहिए और किस तरह के भोजन को नहीं ग्रहण करना चाहिए। साथ ही इस संबंध में हम विशेषज्ञ की राय भी जानेंगे।

डायबिटीज लाइलाज बीमारी नहीं है

डायबिटीज टाइप-2 एक ऐसी बीमारी है जो हमारे शरीर में इंसुलिन की कमी या हमारे शरीर की कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन हार्मोन के प्रतिरोध के कारण उत्पन्न होती है। इंसुलिन की कमी या प्रतिरोध की वजह से खून में शुगर लेवल का स्तर बढ़ जाता है और हमारा शरीर हमें संकेत देने लगता है। यही नहीं कभी-कभी तो शुगर लेवल इतना बढ़ जाता है कि उसे नियंत्रण करना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन डॉ. कलोल गुहा जैसे विशेषज्ञ मानते हैं कि डायबिटीज टाइप-2 कोई लाइलाज बीमारी नहीं है बल्कि खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इसे ठीक किया जा सकता है। यही नहीं एक नियमित समय के बाद सामान्य लोगों की तरह डायबिटीज वाला मरीज भी अपना जीवन जी सकता है।

डॉ. कलोल गुहा के अनुसार डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को सबसे पहले शक्कर चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? या शुगर का सेवन कम करना चाहिए। क्योंकि इसमें सुक्रोज़ की मात्रा अधिक होती है जोकि मरीज के खून में शुगर लेवल को बढ़ाने में सहायता करती है। इसके बाद बजार में उपलब्ध किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ का सेवन जितना हो सके उतना कम करें क्योंकि इसमें फ्रक्टोज़ होता है जोकि ग्लूकोज़ का ही एक रूप होता है और शुगर लेवल को बढ़ाता है।

स्वास्थ्यवर्धक सलाह

आमतौर पर यह कहा जाता है कि फलों का सेवन करने से डायबिटीज टाइप-2 नहीं बढ़ती है लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि फलों में भी ग्लूकोज़ होता है। इसलिए डायबिटीज टाइप-2 वाले मरीज को फलों का सेवन करना तो चाहिए लेकिन अधिक नहीं। इसके अलावा वनस्पति घी से बनी चीजों का उपयोग करने से भी परहेज करना चाहिए।

डॉ. गुहा का कहना है कि आज लोग फास्ट फूड का सेवन अधिक करते हैं लेकिन डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को फास्ट फूड का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। फास्ट फूड के साथ-साथ ब्रेड,बिस्किट और केक का सेवन कम से कम करें क्योंकि इसके सेवन से इंसुलिन हार्मोन में बढ़ोत्तरी होती है। एक सबसे आवश्यक और स्वास्थ्यवर्धक सलाह यह है कि शरीर को कम समय में बलशाली बनाने की गारंटी देने वाली प्रोटीन पाउडर का सेवन न करें।

डायबिटीज टाइप-2 को कंट्रोल करने चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? के लिए ये तो हुई परहेज करने की बात लेकिन प्रश्न यह है कि अगर सभी चीजें छोड़ देंगे तो खाएगें क्या? तो इसका भी उत्तर है:-

किन चीजों का सेवन करें?

डॉ. कलोल गुहा के अनुसार डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को सादा भोजन करना चाहिए, जैसे- दाल,रोटी और सालाद। चावल का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि चावल में ग्लूकोज़ की मात्रा होती है। डायबिटीज में हरी सब्जियों का सेवन करना अधिक लाभकारी होता है। इसलिए अधिक से अधिक हरी सब्जियों का सेवन करें। दूध से बने उत्पादों का उपयोग न के बराबर करें क्योंकि ये इंसुलिन हार्मोन को बढ़ाता है। हरी सब्जियों के साथ बादाम, चिया के बीज, तरबूज के बीज इत्यादि जैसे बीजों का सेवन करें। इसका सेवन हर रोज पानी में भिगो कर करना चाहिए। बीजों के सेवन पर जोर देते हुए डॉ. गुहा कहते हैं कि इसमें विटामिन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसी चीजें होती हैं इसलिए बीजों का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

यदि डाइबिटीज के बारे में संक्षेप में कहा जाए तो यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। मरीज को मुख्य रूप से अपने खानपान की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि दवाओं का सेवन कम से कम करना पड़े। इसके अलावा डाइबिटीज को कभी पूर्ण रूप से समाप्त भी नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये हार्मोन में उतार चढ़ाव के कारण होने वाली बीमारी है जिसे सिर्फ खानपान के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए आप डॉ. कलोल गुहा के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं। लिंक नीचे दिया गया है।

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डायबिटीज टाइप 2 से छुटकारा पाने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं- ये है पूरा ‘डाइट चार्ट

इस लेख में जानेंगे कि डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के भोजन को ग्रहण करना चाहिए और किस तरह के भोजन को नहीं ग्रहण करना चाहिए। साथ ही इस संबंध में हम विशेषज्ञ की राय भी जानेंगे।

Diet chart to get rid of Diabetes type 2

आज के भागदौड़ भरे जीवन में मधुमेह यानी डायबिटीज होना बड़ी समान्य सी बात हो गई है और इसके के लिए बाजार में भी कई प्रकार की दवाईयां उपलब्ध हैं लेकिन डायबिटीज के उपचार के लिए दवाईयों से अधिक खानपान का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। भोजन ही है जो डायबिटीज को नियंत्रित कर सकता है।

इस लेख में जानेंगे कि डायबिटीज टाइप-2 को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के भोजन को ग्रहण करना चाहिए और किस तरह के भोजन को नहीं ग्रहण करना चाहिए। साथ ही इस संबंध में हम विशेषज्ञ की राय भी जानेंगे।

डायबिटीज लाइलाज बीमारी नहीं है

डायबिटीज टाइप-2 एक ऐसी बीमारी है जो हमारे शरीर में इंसुलिन की कमी या हमारे शरीर की कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन हार्मोन के प्रतिरोध के कारण उत्पन्न होती है। इंसुलिन की कमी या प्रतिरोध की वजह से खून में शुगर लेवल का स्तर बढ़ जाता है और हमारा शरीर हमें संकेत देने लगता है। यही नहीं कभी-कभी तो शुगर लेवल इतना बढ़ जाता है कि उसे नियंत्रण करना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन डॉ. कलोल गुहा जैसे विशेषज्ञ मानते हैं कि डायबिटीज टाइप-2 कोई लाइलाज बीमारी नहीं है बल्कि खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इसे ठीक किया जा सकता है। यही नहीं एक नियमित समय के बाद सामान्य लोगों की तरह डायबिटीज वाला मरीज भी अपना जीवन जी सकता है।

डॉ. कलोल गुहा के अनुसार डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को सबसे पहले शक्कर या शुगर का सेवन कम करना चाहिए। क्योंकि इसमें सुक्रोज़ की मात्रा अधिक होती है जोकि मरीज के खून में शुगर लेवल को बढ़ाने में सहायता करती है। इसके बाद बजार में उपलब्ध किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ का सेवन जितना हो सके उतना कम करें क्योंकि इसमें फ्रक्टोज़ होता है जोकि ग्लूकोज़ का ही एक रूप होता है और शुगर लेवल को बढ़ाता है।

स्वास्थ्यवर्धक सलाह

आमतौर पर यह कहा जाता है कि फलों का सेवन करने से डायबिटीज टाइप-2 नहीं चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? बढ़ती है लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि फलों में भी ग्लूकोज़ होता है। इसलिए डायबिटीज टाइप-2 वाले मरीज को फलों का सेवन करना तो चाहिए लेकिन अधिक नहीं। इसके अलावा वनस्पति घी से बनी चीजों का उपयोग करने से भी परहेज करना चाहिए।

डॉ. गुहा का कहना है कि आज लोग फास्ट फूड का सेवन अधिक करते हैं लेकिन डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को फास्ट फूड का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। फास्ट फूड के साथ-साथ ब्रेड,बिस्किट और केक का सेवन कम से कम करें क्योंकि इसके सेवन से इंसुलिन हार्मोन में बढ़ोत्तरी होती है। एक सबसे आवश्यक और स्वास्थ्यवर्धक सलाह यह है कि शरीर को कम समय में बलशाली बनाने की गारंटी देने वाली प्रोटीन पाउडर का सेवन न करें।

डायबिटीज टाइप-2 को कंट्रोल करने के लिए ये तो हुई परहेज करने की बात लेकिन प्रश्न यह है कि अगर सभी चीजें छोड़ देंगे तो खाएगें क्या? तो इसका भी उत्तर है:-

किन चीजों का सेवन करें?

डॉ. कलोल गुहा के अनुसार डायबिटीज टाइप-2 के मरीज को सादा भोजन करना चाहिए, जैसे- दाल,रोटी और चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? सालाद। चावल का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि चावल में ग्लूकोज़ की मात्रा होती है। डायबिटीज में हरी सब्जियों का सेवन करना अधिक लाभकारी होता है। इसलिए अधिक से अधिक हरी सब्जियों का सेवन करें। दूध से बने उत्पादों का उपयोग न के बराबर करें क्योंकि ये इंसुलिन हार्मोन को बढ़ाता है। हरी सब्जियों के साथ बादाम, चिया के बीज, तरबूज के बीज इत्यादि जैसे बीजों का सेवन करें। इसका सेवन हर रोज पानी में भिगो कर करना चाहिए। बीजों के सेवन पर जोर देते हुए डॉ. गुहा कहते हैं कि इसमें विटामिन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसी चीजें होती हैं इसलिए बीजों का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

यदि डाइबिटीज के बारे में संक्षेप में कहा जाए तो यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। मरीज को मुख्य रूप से अपने खानपान की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि दवाओं का सेवन कम से कम करना पड़े। इसके अलावा डाइबिटीज को कभी पूर्ण रूप से समाप्त भी नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये हार्मोन में उतार चढ़ाव के कारण होने वाली बीमारी है जिसे सिर्फ खानपान के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए आप डॉ. कलोल गुहा के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं। लिंक नीचे दिया गया है।

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GANTT Chart क्या है?

GANTT चार्ट क्या है? हिंदी में [What is GANTT Chart? In Hindi]

गैंट चार्ट एक Project Management tool है जो एक Project plan को दिखाता है। इसमें आम तौर पर दो खंड शामिल होते हैं: बाईं ओर कार्यों की एक सूची की रूपरेखा होती है, जबकि दाईं ओर शेड्यूल बार के साथ एक समयरेखा होती है जो काम की कल्पना करती है। गैंट चार्ट में कार्यों की शुरुआत और समाप्ति तिथियां, मील के पत्थर, कार्यों के बीच निर्भरता और असाइनमेंट भी शामिल हो सकते हैं। आधुनिक सॉफ्टवेयर विकास की मांगों को पूरा करने के लिए, जीरा सॉफ्टवेयर जैसे रोडमैप टूल में एक संक्षिप्त कार्य संरचना और संसाधन प्रबंधन पैनल जैसी विशेषताएं शामिल हैं। ये रोडमैप उपकरण टीमों को सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया की पुनरावृत्ति प्रकृति के बावजूद एक सुसंगत परियोजना रणनीति बनाए रखने में मदद करते हैं।

Project Management में गैंट चार्ट एक लोकप्रिय उपकरण है। यह मूल रूप से उन गतिविधियों को कम करता है जिन्हें एक निश्चित समय अवधि तक करने की आवश्यकता होती है। यह आमतौर पर प्रोजेक्ट शेड्यूल को ट्रैक करने के लिए उपयोग किया जाता है।

चार्ट पर, कार्यों को ऊर्ध्वाधर अक्ष पर दिखाया जाता है जबकि निर्धारित समय-व्यय क्षैतिज अक्ष पर निर्धारित किया जाता है। प्रत्येक कार्य को एक बार द्वारा दर्शाया जाता है जो परियोजना के लिए आवश्यक समय दिखाता चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? है।

बार तब पूर्ण किए गए कार्यों का प्रतिशत दर्शाता है या दिखाता है। यह निर्भरता को भी दर्शाता है, जिसका सीधा सा अर्थ है परियोजना में विभिन्न गतिविधियों के बीच अंतर्संबंध।

गैंट चार्ट किसके लिए प्रयोग किया जाता है? [What is a Gantt chart used for? In Hindi]

  • एक व्यापक परियोजना का निर्माण और प्रबंधन

गैंट चार्ट एक परियोजना के निर्माण खंडों की कल्पना करते हैं और इसे छोटे, अधिक प्रबंधनीय कार्यों में व्यवस्थित करते हैं। परिणामी छोटे कार्यों को गैंट चार्ट की टाइमलाइन पर शेड्यूल किया जाता है, साथ ही टास्क, असाइनी और माइलस्टोन के बीच निर्भरता के साथ।

  • रसद और कार्य निर्भरता निर्धारित करें

किसी प्रोजेक्ट के लॉजिस्टिक्स पर नजर रखने के लिए गैंट चार्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्य निर्भरताएँ सुनिश्चित करती हैं कि एक नया कार्य केवल एक बार दूसरा कार्य पूरा होने के बाद शुरू हो सकता है। यदि किसी कार्य में देरी हो चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? रही चार्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? है (यह हममें से सर्वश्रेष्ठ के साथ होता है), तो आश्रित मुद्दे स्वतः ही पुनर्निर्धारित हो जाते हैं। बहु-टीम वातावरण में योजना बनाते समय यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

  • एक परियोजना की प्रगति की निगरानी करें

जैसे-जैसे टीमें आपकी योजना में मुद्दों के लिए समय लेती हैं, आप अपनी परियोजनाओं के स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं और आवश्यकतानुसार समायोजन कर सकते हैं। आपके प्रोजेक्ट की प्रगति को ट्रैक करने के लिए आपके गैंट चार्ट में रिलीज़ दिनांक, Milestones या अन्य महत्वपूर्ण मीट्रिक शामिल हो सकते हैं।

हेनरी लारेंस गैन्ट की (1861-1919) Management की सबसे लोकप्रिय विरासत गैंट चार्ट थी। आज एक Common Project Management Tools के रूप में स्वीकृत, यह 1920 के दशक में विश्वव्यापी महत्व का एक नवाचार था।

गैंट चार्ट प्रबंधकों और श्रमिकों को उनके द्वारा पूरा किए जाने वाले परियोजना कार्यों का एक उच्च-स्तरीय अवलोकन देता है, साथ ही अपना काम पूरा करने के लिए एक समय सारिणी भी देता है। कार्य एक दूसरे से कैसे संबंधित हैं, यह दिखाते हुए चार्ट आपको परियोजना की प्रगति की निगरानी करने में मदद करता है।

Normal Hemoglobin Range: उम्र के हिसाब से शरीर में कितनी होनी चाहिए खून की मात्रा, देखें नॉर्मल हीमोग्लोबिन रेंज के लिए ये सिंपल चार्ट

How to increase hemoglobin: मानव शरीर में खून की मात्रा आमतौर पर शरीर के वजन के 7 प्रतिशत के बराबर होती है।

Normal Hemoglobin Range: उम्र के हिसाब से शरीर में कितनी होनी चाहिए खून की मात्रा, देखें नॉर्मल हीमोग्लोबिन रेंज के लिए ये सिंपल चार्ट

Normal Hemoglobin Range: नार्मल हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए ? (Image: canava)

Hemoglobin levels: खून में हीमोग्लोबिन सही होगा तो दिमाग से लेकर दिल तक और पूरा शरीर शरीर में सुचारू रूप से काम करेगा। हीमोग्लोबिन की कमी (Low hemoglobin levels) से कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। अत्यधिक कमी भी मृत्यु का कारण बन सकती है। इसलिए शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखना बहुत जरूरी है।

सामान्य हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए | What should be the normal hemoglobin

पुरुषों और महिलाओं के हीमोग्लोबिन (Normal hemoglobin levels) का स्तर अलग-अलग होता है। आमतौर पर पुरुषों में हीमोग्लोबिन (What are hemoglobin levels?) का सामान्य स्तर 13.5-17.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर होता है। महिलाओं में यदि यह स्तर 12.0-15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो तो हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य मानी जाती है। (Normal hemoglobin levels Chart)

खून की कमी के संकेत | Signs of anemia

  • तेज चक्कर आना
  • त्वचा का पीला पड़ना
  • त्वचा का सफेद दिखना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • जीभ, नाखूनों के अंदर सफेदी
  • कमजोरी, थकान महसूस होना
  • चेहरे या पैरों पर सूजन दिखाई देना
  • सिरदर्द होना और ये समस्या बढ़ना
  • दिल की धड़कन का असामान्य महसूस करना

उम्र के अनुसार सामान्य हीमोग्लोबिन का स्तर | Normal hemoglobin levels by age

  • नवजात: 14-24 g/dL
  • 0-2 सप्ताह: 12-20 g/dL
  • 2-6 महीने: 10-17 g/dL
  • 6 महीने-1 साल: 9.5-14 g/dL
  • 1-6 साल: 9.5-14 g/dL
  • 6-18 वर्ष: 10-15.5 g/dL
  • वयस्क पुरुष: 14-18 g/dL
  • वयस्क महिलाएं: 12-16 g/dL
  • गर्भवती लोग: >11 g/dL

बच्चों, पुरुषों और महिलाओं में हीमोग्लोबिन की सामान्य मात्रा | Normal values for hematologic parameters in children, Male and Female

AgeHemoglobin (g/dL)Hemoglobin (g/dL)Hematocrit (%)Hematocrit (%)MCV (fL)MCV (fL)RDW (%)RDW (%)
उम्र लोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिट
6 माह से 11.0¶13.53142738512.315.6
2 से 6 वर्ष11.0¶13.7344475861214.6
6 से 12 वर्ष11.214.53544789011.913.8
12 से लोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिटलोवर लिमिटअपर लिमिट
महिला11.414.73646809611.914.6
पुरूष12.416.44051809611.913.7
(Source- American Society of Hematology)

MCV: मतलब कोरपसकुलर वॉल्यूम; RDW: रेड सेल डिस्ट्रब्यूशन विड्थ

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AAMRAPALI DUBEY SHIV BHAKTI

* जन्म के बाद पहले 6 महीनों के दौरान हीमोग्लोबिन, हेमेटोक्रिट और एमसीवी के सामान्य स्तर में परिवर्तन होता है।

¶ इन उम्र में हीमोग्लोबिन के लिए सामान्य की निचली सीमा (यानी, 2.5वां प्रतिशत) 11 g/dL से थोड़ा कम है। हालांकि, शिशुओं और छोटे बच्चों में आयरन की कमी वाले एनीमिया की जांच के उद्देश्य से कई विशेषज्ञ ऐब्नॉर्मल स्क्रीन को परिभाषित करने के लिए हीमोग्लोबिन

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