म्यूचुअल फंड क्यों निकाल रहे हैं निवेश

विदेशी बॉन्ड फंड

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विदेशी निवेश लगा रहे हैं पैसे लेकिन घरेलू निवेशक बाजार से निराश, म्यूचुअल फंड ने लगातार पांचवें महीने निकासी की

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 09 Nov 2020 02:35 PM (IST)

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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी और देशी निवेशकों दोनों ने अलग-अलग राह पकड़ी है. एफपीआई समेत दूसरे विदेशी निवेशक यहां बिजनेस विदेशी बॉन्ड फंड गतिविधियां जोर पकड़ने की उम्मीद में निवेश कर रहे हैं वहीं म्यूचुअल फंड शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI ने नवंबर के पहले पांच कारोबारी सेशन में भारतीय बाजारों में 8,381 करोड़ रुपये लगाए वहीं अक्टूबर महीने में म्यूचुअल फंड्स ने शेयरों से 14,300 करोड़ रुपये की भारी निकासी कर डाली.

बिजनेस गतिविधियां बढ़ने और अच्छे नतीजों ने बढ़ाया निवेश

Bond market: विदेशी बाजार में बढ़ेगी भारतीय बॉन्ड की पहुंच

जनता से रिश्ता वेबडेस्क: कोविड-19 महामारी के बीच खर्चे पूरे करने के लिए 12 लाख करोड़ जुटाने की तैयारी में लगी सरकार की राह आसान हो सकती है। भारत अक्तूबर तक वैश्विक बॉन्ड सूचकांक में शामिल हो जाएगा, जिससे भारतीय बॉन्ड के लिए पहली बार दुनिया के शीर्ष बेंचमार्क के रास्ते भी खुल जाएंगे। मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत 2019 से ही वैश्विक बॉन्ड सूचकांक मेें शामिल होने की कोशिश कर रहा था, ताकि विदेशी बाजारों से बॉन्ड के जरिए फंड जुटाना आसान हो जाए। वैसे तो उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भारत का बॉन्ड बाजार सबसे बड़ा है।

भारत का बॉन्ड बाजार अभी करीब 800 अरब डॉलर का है, लेकिन विदेशी निवेशकों के कई प्रतिबंधों की वजह से इन्हें दुनिया के शीर्ष बेंचमार्क में शामिल नहीं किया जाता। अगर अक्तूबर तक वैश्विक बॉन्ड सूचकांक में भारत शामिल होता है, तो जेपी मॉर्गन और ब्लूमबर्ग बार्कलेज जैसी बड़े सूचकांक से अनुमति मिल जाएगी। इससे सरकार के लिए 165.24 अरब डॉलर के बॉन्ड से सस्ता कर्ज जुटाना आसान हो जाएगा। हालांकि, पूंजी जुटाने का काम सूचकांक पर पंजीकरण के 12 महीने बाद शुरू हो जाएगा।

विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाले 14 हजार करोड़, बॉन्ड में निवेश का भी घटा आकर्षण

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एफपीआई द्वारा बिकवाली का सिलसिला नियर टर्म में जारी रह सकता है लेकिन शॉर्ट और मीडियम टर्म में इसमें गिरावट आ सकती है. (Image- Pixabay)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPO) का भारतीय शेयर बाजारों से निकासी का सिलसिला जारी है. घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर घटनाक्रमों से चिंतित विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं और इस महीने जून में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों से 13888 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 1.81 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं. पिछले साल अक्टूबर 2021 से ही एफपीआई लगातार भारतीय शेयरों से पैसे निकाल रहे हैं. भारत के अलावा एफपीआई ने इस महीने जून में अब तक ताइवान, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और फिलीपींस जैसे उभरते बाजारों से भी निकासी की है.

बिकवाली की प्रमुख वजह

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक अभी एफपीआई की बिकवाली की प्रमुख फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति है. ट्रेडस्मार्ट के चेयरमैन विजय सिंघानिया के मुताबिकअमेरिका में चार दशक के हाई स्तर 8.6 फीसदी पर इंफ्लेशन पहुंचने और चीन में फिर से लॉकडाउन लगाए जाने के चलते वैश्विक स्तर पर बिकवाली का दौर चल रहा है. आरबीआई ने भी रेपो रेट में बढ़ोतरी की और इंफ्लेशन के अपने अनुमान में बढ़ोतरी की है जिससे एफपीआई की बिकवाली को प्रोत्साहन मिला.

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अब आगे क्या स्थिति है मार्केट की

नायर के मुताबिक बिकवाली का यह सिलसिला नियर टर्म में जारी रह सकता है लेकिन शॉर्ट और मीडियम टर्म में इसमें गिरावट आ सकती है. नायर ने कहा कि इसकी वजह ये है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती, सख्त मौद्रिक रुख, सप्लाई की दिक्कतों और हाई इंफ्लेशन को बाजार पहले ही स्वीकार कर चुका है. लांग टर्म में केंद्रीय बैंकों का आक्रामक मौद्रिक रुख तभी जारी रहेगा जबकि इंफ्लेशन हाई हो.

इक्विटी के अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने डेट मार्केट से भी इस महीने निकासी है. एफपीआई ने इस महीने अब तक बॉन्ड विदेशी बॉन्ड फंड मार्केट से 600 करोड़ रुपये की निकासी की है और वे इस साल फरवरी से बॉन्ड से पैसे वापस खींच रहे हैं. मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक रिस्क रिवार्ड और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों के हिसाब से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बांड बाजार निवेश का आकर्षक विकल्प नहीं रह गया है.

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Mutual Fund: टैक्स-बचत विकल्प इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) एक प्रकार का इक्विटी फंड है और यह एकमात्र म्यूचुअल फंड है, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 80 C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा ईएलएसएस फंड विविध इक्विटी फंड हैं जो लार्ज, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों सहित कई मार्केट कैप वाली कंपनियों में निवेश करते हैं। यही वजह है कि इस फंड को काफी पंसद किया जाता है।

फाइनेंस एक्सपर्ट इस फंड में लंबे समय तक निवेश को बनाए रखने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि लाॅन्ग टर्म में यह फंड हाई रिटर्न देने की क्षमता रखता है। आपको बता दें कि ईएलएसएस फंड (equity-linked savings scheme (ELSS)) से टैक्सपेयर्स सालाना 46,800 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। यहां, हमने एचडीएफसी टैक्ससेवर फंड को एक उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया है, जिसने अपनी स्थापना के 26 साल पूरे कर लिए हैं और इसके निवेशक करोड़पति बन गए हैं।

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