मुंबई: देश का विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में 24.82 करोड़ डॉलर घटकर 405.81 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी के बावजूद आई है. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों में इस बात की जानकारी दी गई है.

भारत का घटता विदेशी मुद्रा भंडार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आ रही है। हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार के स्वर्ण आरक्षित घटक में बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन विदेशी मुद्रा भण्डार के अन्य घटकों, जैसे- विशेष आहरण अधिकार (SDR), विदेशी परिसंपत्तियों और IMF के पास “रिज़र्व ट्रेंच” आदि में गिरावट दर्ज की गई है।

गिरावट का मुख्य कारण:

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में गिरावट की वजह से मुद्रा भंडार में कमी हुई है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, कुल विदेशी मुद्रा भंडार का प्रमुखभाग होती है।

क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?

  • विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकें।
  • यह भंडार एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखे जाते हैं। ज्यादातर डॉलर और कुछ सीमा तक यूरो में विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल होता है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व या एफएक्स रिजर्व भी कहा जाता है।
  • पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है।
  • यह आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था को बहुत आवश्यक मदद उपलब्ध कराता है।
  • इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति,स्वर्ण विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार के फायदे:

  • मौद्रिक और विनिमय दर प्रबंधन हेतु निर्मित नीतियों के प्रति समर्थन और विश्वास बनाए रखना।
  • संकट के समय या जब उधार लेने की क्षमता कमज़ोर हो जाती है, तो संकट विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम के समाधान के लिये विदेशी मुद्रा तरलता को बनाए रखते हुए बाहरी प्रभाव को सीमित करता है।
  • अच्छी विदेशी मुद्रा आरक्षित रखने वाला देश, विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास अर्जित करता है।
  • इससे वैश्विक निवेशक, विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम देश में और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।
  • सरकार जरूरी सैन्य सामान की तत्काल खरीदी का निर्णय भी ले सकती है, क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है।
  • इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार, प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

विदेशी मुद्रा भण्डार में क्या क्या शामिल हैं?

  • विदेशी परिसंपत्तियाँ (विदेशी कंपनियों के शेयर, डिबेंचर, बाण्ड इत्यादि विदेशी मुद्रा में)
  • स्वर्ण भंडार
  • IMF के पास रिज़र्व ट्रेंच
  • विशेष आहरण अधिकार (SDR)

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA)

  • विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ वे हैं जिनका मूल्यांकन उस देश की अपनी मुद्रा के बजाय किसी अन्य देश विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम की मुद्रा में किया जाता है।
  • FCA,विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है। इसे डॉलर के संदर्भ में व्यक्त किया जाता है।गैर-अमेरिकी मुद्रा जैसे- यूरो, पाउंड और येन की कीमतों में उतार-चढ़ाव को FCAमें शामिल किया जाता है।

स्वर्ण भंडार:

  • केंद्रीय बैंकों के विदेशी भंडार में स्वर्ण एक विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इसे मुख्य तौर पर विविधीकरण के उद्देश्य से आरक्षित किया जाता है।
  • उच्च गुणवत्ता और तरलता के साथ स्वर्ण, अन्य पारंपरिक आरक्षित परिसंपत्तियों की तुलना में बेहद अनुकूल होता है, जो केंद्रीय बैंकों को मध्यम और दीर्घकाल में पूंजी संरक्षण, पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिमों को कम करने में मदद करता है।
  • स्वर्ण ने अन्य वैकल्पिक वित्तीय परिसंपत्तियों की तुलना में लगातार बेहतर औसत रिटर्न दिया है।

IMF के पास रिज़र्व ट्रेंच

रिज़र्व ट्रेंच वह मुद्रा होती है जिसे प्रत्येक सदस्य देश द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को प्रदान किया जाता है। यह एक तरह का आपातकालीन कोष होता है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, व्यापार घाटा 43 महीने के उच्चतम स्तर पर, स्वर्ण भंडार भी घटा

विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में 24.82 करोड़ डॉलर घटकर 405.81 अरब डॉलर रह गया. जून 2018 में व्यापार घाटा नवंबर 2014 के बाद सबसे अधिक रहा है. The post भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, व्यापार घाटा 43 महीने के उच्चतम स्तर पर, स्वर्ण भंडार भी घटा appeared first on The Wire - Hindi.

विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में 24.82 करोड़ डॉलर घटकर 405.81 अरब डॉलर रह गया. जून 2018 में व्यापार घाटा नवंबर 2014 के बाद सबसे अधिक रहा है.

Reserve Bank Reuters


मुंबई: देश का विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में 24.82 करोड़ डॉलर घटकर 405.81 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी के बावजूद आई है. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों में इस बात की जानकारी दी गई है.

इससे पहले के सप्ताहांत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.76 अरब डॉलर घटकर 406.06 अरब डॉलर रह गया था.

इससे पूर्व विदेशी मुद्रा भंडार 13 अप्रैल 2018 को 426.028 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गया था. आठ सितंबर 2017 को मुद्रा भंडार पहली बार 400 अरब डॉलर के स्तर को लांघ गया था लेकिन उसके बाद से उसमें उतार-चढ़ाव बना रहा.

रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम के आंकड़े दर्शाते हैं कि समीक्षाधीन सप्ताह में कुल मुद्राभंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा, विदेशी मुद्रा आस्तियां 7.39 करोड़ डॉलर की मामूली वृद्धि के साथ 380.792 अरब डॉलर की हो गईंं.

डॉलर में अभिव्यक्त किये जाने वाले मुद्राभंडार में रखे गये विदेशी मुद्रा आस्तियां, यूरो, पॉंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की मूल्य वृद्धि अथवा उनके अवमूल्यन के प्रभावों को भी अभिव्यक्त करता है.

समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार 32.99 करोड़ डॉलर घटकर 21.039 अरब डॉलर रह गया.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में विशेष निकासी अधिकार 29 लाख डॉलर बढ़कर 1.489 अरब डॉलर हो गया.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि आईएमएफ में देश का मुद्राभंडार भी 49 लाख डॉलर बढ़कर 2.489 अरब डॉलर का हो गया.

व्यापार घाटा 43 माह के उच्चस्तर पर

वहीं, देश का निर्यात कारोबार जून में 17.57 प्रतिशत बढ़कर 27.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पेट्रोलियम और रसायन जैसे क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से निर्यात में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. हालांकि, कच्चे तेल का आयात महंगा होने से व्यापार घाटा 43 महीने के उच्च स्तर 16.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

वाणिज्य मंत्रालय के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन महीने में आयात भी 21.31 प्रतिशत बढ़कर 44.3 अरब डॉलर रहा.

जून, 2018 में व्यापार घाटा नवंबर, 2014 के बाद सबसे अधिक रहा है. उस समय व्यापार घाटा 16.86 अरब डॉलर रहा था. जून, 2017 में व्यापार घाटा 12.96 अरब डॉलर था.

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून की तिमाही में निर्यात 14.21 प्रतिशत बढ़कर 82.47 अरब विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम डॉलर रहा है. पहली तिमाही में आयात 13.49 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 127.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस दौरान व्यापार घाटा 44.94 अरब डॉलर रहा.

जून में पेट्रोलियम उत्पादों, रसायन, फार्मास्युटिकल्स, रत्न एवं आभूषण तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों की विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम वजह से निर्यात में उल्लेखनीय इजाफा हुआ.

हालांकि, इस दौरान कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, पॉल्ट्री, काजू, चावल और कॉफी के निर्यात में गिरावट आई.

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश गुप्ता ने बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे चालू खाते का घाटा (कैड) प्रभावित होगा, जिससे राजकोषीय मोर्चे पर सरकार की परेशानी बढ़ेगी.

जून माह के दौरान कच्चे तेल का आयात 56.61 प्रतिशत बढ़कर 12.73 अरब डॉलर रहा.

वहीं, सोने का आयात तीन प्रतिशत घटकर 2.विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम 38 अरब डॉलर रह गया.

इसके बीच, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मई में सेवाओं का निर्यात 7.91 प्रतिशत घटकर 16.17 अरब डॉलर रह गया. माह के दौरान सेवाओं में व्यापार संतुलन 5.97 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. मई में सेवाओं का आयात 10.21 अरब डॉलर रहा.

फर्जी आनलाइन पाठ्यक्रमों और विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग के नाम पर काले धन को सफेद बनाने का खेल

हाल में ही कोलकाता स्थित केनरा बैंक की ब्रांच की शिकायत पर पुलिस द्वारा कार्यवाही की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

१. आनलाइन पाठ्यक्रमों के काम में लिप्त दो कंपनियों के खाते बैंक में खुलवाए गए.

२. यह खाते फर्जी केवायसी कागजातों के आधार पर खुलवाए गए.

३. जब कंपनियों के खाते में बड़े संदिग्ध लेनदेन हुए तो बैंक प्रशासन ने इसकी जांच की तो पाया कागजात फर्जी है.

४. बैंक द्वारा पुलिस शिकायत के बाद पता चला कि एक पैशेवर और उसके भाई द्वारा सारा लेनदेन किया जा रहा है.

५. बीस करोड़ रुपए बैंक खाते में जमा मिलें और इसके अलावा लगभग कैश ८ करोड़ रुपए इन लोगों के घर और कार में मिलें. इसके अलावा ज्वैलरी हीरे जवाहरात अलग मिलें.

६. दोनों भाई फरार है और खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है.

७. साफ है दोनों लोग काले को सफेद बनाने के खेल में संलिप्त थे. काला धन लेकर अलग अलग जगह से कोर्स के नाम पर कंपनियों के खाते में जमा करवाया जाता था और फिर कंपनियों के खाते से बैंक माध्यम से पैसे खर्च के रूप में बाहर निकालकर उसे सफेद बना दिया जाता था.

८. इस व्यापार स्तर का खेल पूरे भारतवर्ष में फैला हुआ है. साफ है कैश रुपी एक समानांतर अर्थव्यवस्था देश में चल रही है जिस पर किसी भी तरह की नोटबंदी का कोई प्रभाव नहीं होता है.

९. लोग समयानुसार तरीके बदलते हैं लेकिन काला धन कमाना नहीं छोड़ते और इसका दोष हमारी वित्तीय एवं राजस्व नीतियों में खामियों को दिया जा सकता है.

इसी तरह अभी भोपाल में हुई आयकर रेड की बात करें तो यह तथ्य सामने आते है:

१. डायरियों पर ही 400 करोड़ से अधिक की जमीन की खरीद-फरोख्‍त के सबूत मिले हैं।

२. व्यापारियों के कर्मचारियों के परिसर से लेन-देन की डायरी और जमीन की बिक्री की डायरी बरामद की गई है।

३. इंदौर में टीनू संघवी के वास्तु ग्रुप और मंत्री परिवार के लाभम और शुभम ग्रुप पर चल रहे छापे के दौरान पार्टनर अलका बिसानी ने आयकर विभाग को शपथ पत्र पर कहा कि उनके पास 10 से 15 लाख कैश है लेकिन जब वार्डरोब के पीछे की सीक्रेट अलमारी खुली तो कैश देखकर सबके होश उड़ गए।

४. इस छापेमारी के दौरान अलका की वार्डरोब काफी व्यस्त सजी हुई थी, उसको देखने पर अधिकारियों को कुछ शंका हुई। और काफी खोजबीन की तो उसमें वार्डरोब की दीवार के पीछे एक विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम गोपनीय गोदरेज की अलमारी रखी हुई थी जिसमें 500 और 2 हजार के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। इन नोटों को निकाला, देर रात तक गिनती 3 करोड़ से ज्यादा तक पहुंच चुकी थी।

५. नोट गिनने की मशीन भी रखी हुई थी। वहीं ज्वेलरी वैल्यूएशन 10 करोड़ तक पहुंच गया है।

६. आयकर विभाग ने रियल एस्टेट कारोबारियों और उनसे जुड़े लोगों के यहां छापा अभी जारी है.

७. देव बेकरी और एचडी वायर के संचालक दिलीप देव के भी इन ग्रुप से संबंध मिले हैं और पता चला है कि वे भी अपना पैसा लगाते थे।

८. इसी कड़ी में अकाउंटेंट के घर भी विभाग के अधिकारी पहुंचे थे। यहां से बरामद हुई डायरियों में लेन-देन के हिसाब के साथ कोड लिखे मिले।

९. इस बीच आयकर विभाग ने कार्रवाई की जद में आए कारोबारियों के एक दर्जन से ज्यादा बैंक लॉकर भी सील कर दिए हैं।

१०. किसानों के नाम से जमीन के सौदे के दस्तावेज और करार भी जांच टीम के हाथ लगे हैं।

उपरोक्त तथ्यों से साफ है कि बड़ी मात्रा में काला धन कैश के रूप में, फर्जी कंपनियों के नाम पर, फर्जी दस्तावेज के आधार पर, किसानों और कर्मचारियों के नाम पर, प्रापर्टी और सोना जवाहरात के रूप में – देश में खेल चल रहा है.

सबसे आश्चर्यजनक बात ये है विदेशी मुद्रा व्यापारी पाठ्यक्रम कि ये सब इतने कठोर अनुपालन और नियमों के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा है. मतलब साफ है कोई भी उपाय कर लें सरकार जब तक व्यापारी और जनता को नीति निर्धारण का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा, शायद आगे भी चलता रहेगा और हम छापों की खबर पढ़ते रहेंगे लेकिन काले को सफेद बनाने का खेल किसी न किसी रूप में जारी रहेगा.

*सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर ९८२६१४४९६५*

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