Indian Railways

रेलगाड़ी

रेल ( rel , “ rail ” ) +‎ गाड़ी ( gāṛī , “ car ” ) ; calque of English railcar.

Pronunciation Edit

  • ( Delhi Hindi ) IPA (key) : /ɾeːl.ɡɑː.ɽiː/ , [ɾeːl̪.ɡäː.ɽiː]

Noun Edit

भाफ के ज़ोर से कैसी अच्छी तरह से रेल गाड़ी और धुआंकश चलते हैं। bhāph ke zor se kaisī acchī tarah se rel gāṛī aur dhuāṅkaś calte ha͠i. How wonderfully do trains and chimneys run through the power of steam.

देश में कब से चलेगी पहली बुलेट ट्रेन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई तारीख

देश में पहली बुलेट ट्रेन कब से चलनी शुरू हो जाएगी? अकसर लोग यह सवाल पूछते रहे हैं क्योंकि देश में कई स्थानों पर बुलेट ट्रेन प्रस्तावित है, लेकिन अब तक रेलवे की ओर से इनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं दी गई।

देश में कब से चलेगी पहली बुलेट ट्रेन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई तारीख

देश में पहली बुलेट ट्रेन कब से चलनी शुरू हो जाएगी? अकसर लोग यह सवाल पूछते रहे हैं क्योंकि देश में कई स्थानों पर बुलेट ट्रेन प्रस्तावित है, लेकिन अब तक रेलवे की ओर से इनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं दी गई है। इस बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि है कि 2026 में गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा क्योंकि इस दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। वैष्णव, सरकार की महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए सूरत में थे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'हमने सूरत और बिलिमोरा के बीच 2026 में पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य रखा है। इसमें अच्छी प्रगति हो रही है और हमें विश्वास है कि तब तक हम ट्रेन चलाने का काम पूरा कर लेंगे।'

बिलिमोरा, दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले का एक शहर है। इस परियोजना के तहत अहमदाबाद और मुंबई के बीच ‘हाई स्पीड रेल’ (एचएसआर) गलियारे में 320 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से बुलेट ट्रेन चलाई जानी है। यह दूरी 508 किलोमीटर की है और दोनों गंतव्य के बीच 12 स्टेशन होंगे। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच यात्रा में छह घंटे लगते हैं, लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह अवधि घटकर तीन घंटे होने की उम्मीद है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1.1 लाख करोड़ रुपये है और 81 प्रतिशत खर्च जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग ट्रेंड रेवसल एजेंसी (जेआईसीए) वहन करेगी। वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मार्ग की 61 किलोमीटर दूरी पर खंभे लगाए जा चुके हैं और 150 किलोमीटर पर काम चल रहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली से वाराणसी के रूट पर भी बुलेट ट्रेन का संचालन प्रस्तावित है। बीते कुछ सालों में तेजस, वंदे भारत समेत कई हाई स्पीड ट्रेनें लॉन्च की गई हैं, लेकिन बुलेट ट्रेनों का संचालन भारतीय रेलवे के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

कोहरे के मौसम में ट्रेनों की देरी से बचने के लिए भारतीय रेलवे का नया कदम,अब कोहरे की वजह लेट नहीं होंगी ट्रेन

अब कोहरे की वजह से ट्रेन लेट या कैंसिल नहीं होगी. कोहरे के मौसम में ट्रेनों के संचालन के लिए सुरक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा उठाया है.

Indian Railways

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वरुण सिन्हा

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2022,
  • (Updated 07 दिसंबर 2022, 7:58 AM IST)

हर साल कोहरे की वजह से ट्रेन कैंसिल होती हैं तो कई बार कोहरे की वजह से ट्रेन के परिचान ट्रेंड रेवसल में भी दिक्कत आती है. ऐसे में भारतीय रेल ने इस बार यात्रियों को सुविधा का ध्यान रखते हुए कई ऐसे कदम उठाए हैं जिसकी वजह से इस बार कोहरे की वजह से ट्रेन लेट या कैंसिल नहीं होगी. कोहरे के मौसम में ट्रेनों के संचालन के लिए सुरक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने देश के उत्तरी भागों में कोहरे के दौरान ट्रेनों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

लगाया जाएगा फॉग डिवाइस
लोकोमोटिव में फॉग उपकरणों के उपयोग से कोहरे/खराब मौसम की स्थिति के दौरान अधिकतम अनुमेय गति को 60 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 75 किमी प्रति घंटा किया जा सकता है. कोहरे के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में चलने वाले सभी इंजनों में लोको पायलटों को विश्वसनीय फॉग सेफ डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं. रेलवे इस बात का ध्यान दे रहा है की डेटोनेटर लगाने और डेटोनेटर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. डेटोनेटर सिग्नल, जिन्हें डेटोनेटर या फॉग सिग्नल के रूप में जाना जाता है, ऐसे उपकरण हैं जो पटरियों पर लगे होते हैं और जब कोई इंजन उनके ऊपर से गुजरता है, तो वे चालक का ध्यान आकर्षित करने के लिए जोर से आवाज करते हैं.

सभी सिगनल साइटिंग बोर्ड, सीटी बोर्ड, फॉग सिगनल पोस्ट और व्यस्त संवेदनशील समपार फाटक, जो दुर्घटना संभावित हैं को पेंट किया गया है. कोहरे के मौसम की शुरुआत से पहले उनकी उचित दृश्यता के लिए फिर से रंगाई का काम पूरा किया जा रहा है. व्यस्त लेवल क्रॉसिंग पर लिफ्टिंग बैरियर, जहां आवश्यक हो, पीले/काले चमकदार संकेत स्ट्रिप्स प्रदान किए जाएंगे.

कोहरे के मौसम में सुरक्षा जरूरी
नए मौजूदा सीटिंग कम लगेज रेक (एसएलआरएस) में पहले से ही एलईडी आधारित फ्लैशर टेल लाइट लगाई जा रही है, इसलिए, स्थिर लाल बत्तियों वाले मौजूदा एसएलआर को संशोधित किया जा रहा है. कोहरे के मौसम में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्टॉप सिगनल की पहचान के लिए सिग्मा शेप में रेट्रो रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप मौजूदा निर्देशों के अनुसार प्रदान की जाए.

वही रेलवे की तरफ से निर्देश दिए गए है कि कोहरे के मौसम में लोको पायलट सभी सावधानियों का पालन करें. कोहरे के दौरान, जब लोको पायलट अपने निर्णय में महसूस करता है कि कोहरे के कारण दृश्यता प्रतिबंधित है, तो वह उस गति से दौड़ेगा जिस पर वह ट्रेन को नियंत्रित कर सकता है ताकि किसी भी बाधा से पहले रुकने के लिए तैयार रहे. यह गति किसी भी स्थिति में 75 किमी प्रति घंटे से अधिक नहीं होगी. असल में लेवल क्रॉसिंग पर आने वाली ट्रेन के गेटमैन और सड़क उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देने के लिए लोको पायलट बार-बार सीटी बजाते हैं.

अगस्त के महीने ट्रेंड रेवसल से शुरू हो जाएगी वंदेमातरम ट्रेन : रेल मंत्री

अगस्त के महीने से शुरू हो जाएगी वंदेमातरम ट्रेन : रेल मंत्री

अगस्त के महीने से शुरू हो जाएगी वंदेमातरम ट्रेन : रेल मंत्री

केंद्रीय रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा कि वर्ल्ड क्लॉस ट्रेन वंदेमातम अगस्त के महीने से शुरु होने जा रही है। इसके बाद आठ से दस वर्ल्ड क्लॉस ट्रेन भी मिलेगी। कहा कि कोरोना कॉल में बदं सभी ट्रेनें सितंबर तक चालू हो जाएगी।

बुधवार को रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव सहारनपुर पहुंचे। सहारनपुर में नॉर्दन रेलवे के जीएम और डीआरएम भी मौजूद रहे। रेल मंत्री ने नॉर्दन रेलवे में बेहतर सुधार के निर्देश दिए। इसके बाद सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत की। रेलमंत्री ने कहा कि देश में वर्ल्डक्लॉस ट्रेन की मांग काफी समय से हो रही थी। अगस्त के महीने में देश को पहली वर्ल्ड क्लास ट्रेन वंदेमातरम मिल जाएगी। इसके बाद आठ से दस ट्रेनों को संचालित करने का काम भी किया जाएगा। कहा कि कोरोना कॉल में बंद 40 फीसदी ट्रेनों को सिंतबर तक चालू कर दिया जाएगा। रेलवे ने कोरोना जैसे आपदा में बेहतर काम किया है। रेलवे ने बिजली उत्पादन को कोयला पहुंचाया और दूर दराज के श्रमिकों को भी पहुंचाने का काम किया है।

0-छत्तीसगढ को दी एक ट्रेन की सौगात

रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव ने छत्तीसगढ को एक नई ट्रेन की सौगात सहारनपुर से ही दी। बताया ट्रेंड रेवसल ट्रेंड रेवसल कि छत्तीसगढ के सकुआ क्षेत्र में राजधानी तक साप्ताहिक ट्रेन की मांग की जा रही थी। इस ट्रेंड रेवसल ट्रेन के चलने से जनजाति लोगों को काफी फायदा होगा।

Indian Railways IRCTC की 'नई' Vande Bharat Express हो गई हल्की, लेगी कम वक्त और भागेगी तेज

टाइम्स नाउ डिजिटल

Indian Railways IRCTC Latest News in Hindi: दरअसल, रेलवे ने अगस्त 2023 तक ऐसी 75 ट्रेनों का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस नई ट्रेन ने सभी परीक्षण पूरे कर लिए हैं और यह वाणिज्यिक रूप से चलने को तैयार है।

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  • नई ट्रेन में कई उन्नत प्रणालियां, परीक्षण पूरे
  • कमर्शियल रन के लिए ट्रेन हो गई है तैयार
  • नई ट्रेन के वजन में 38 टन की कमी की गई

Indian Railways IRCTC Latest News in Hindi: भारतीय रेल की वंदे भारत एक्सप्रेस या ट्रेन-18 पहले के मुकाबले हल्की कर दी गई है। ट्रेन की नई गाड़ियां सफर में पहले के मुकाबले कम वक्त लेंगी और तेज भी भागेंगी। शुक्रवार (नौ सितंबर, 2022) को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि रेलवे का टारगेट है कि वंदे भारत ट्रेन का अक्तूबर से नियमित उत्पादन शुरू हो ताकि महीने दो से तीन ट्रेन तैयार की जा सके। इन्हें आने वाले महीनों में बढ़ाकार पांच से आठ किया जाएगा।

वैष्णव के मुताबिक, नई ट्रेन में कई उन्नत प्रणालियां हैं। तीसरी वंदे भारत ट्रेन ने अपने परीक्षण पूरे कर लिए हैं। यह वाणिज्यिक रूप से संचालन के लिए तैयार है। नई ट्रेन मात्र 52 सेकंड में शून्य से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि पुरानी ट्रेन को यह रफ्तार हासिल करने में 54.6 सेकंड का समय लगता था। नई ट्रेन के वजन में भी 38 टन की कमी की गई है जिससे यह और तेज चल सकती है।

रेल मंत्री ने आगे बताया, नई ट्रेन 130 सेकंड में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। पुराने संस्करण वाली ट्रेन को यह गति पाने में 146 सेकंड का समय लगता था। बकौल वैष्णव, “हम अब इसका श्रृंखलाबद्ध तरीके से उत्पादन शुरू करेंगे। परीक्षण पूरा हो चुका है। हमारा लक्ष्य है कि अक्तूबर से शुरू कर हम नियमित उत्पादन चालू कर सकें। इसके तहत हर महीने दो से तीन ट्रेन का उत्पादन किया जाएगा। इसके बाद इस क्षमता को बढ़ाकर पांच से आठ ट्रेन प्रतिमाह किया जाएगा।”

उनके अनुसार, "ज्यादातर ट्रेनों का उत्पादन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया जाएगा।" दरअसल, रेलवे ने अगस्त 2023 तक ऐसी 75 ट्रेनों का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस नई ट्रेन ने सभी परीक्षण पूरे कर लिए हैं और यह वाणिज्यिक रूप से चलने को तैयार है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि यह ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चल सकती है और इसी महीने आधिकारिक रूप से इसकी शुरुआत की जाएगी।

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